Friday, June 24, 2011

सियासत


फैसले देर से किये हमने,
बस यही तो कमी हमारी है.
बंदरों के मतों से तय होगा,
कौन किससे बड़ा मदारी है?
सच कहेगा तो जान जाएगी,
बोल क्या चीज तुझको प्यारी है?
देश सेवा कभी रही होगी,,
अब सियासत दुकानदारी है,,,

Saturday, January 30, 2010

शिकवे,शिकायतों से कुछ नहीं होने वाला

शिकवे,शिकायतों से कुछ नहीं होने वाला,
बदनसीबी से ये दौर इतनी आसानी से नहीं जाने वाला.
देखो हमारे दानिश्वरों की शान......
सोने के कप में चाय,काजू चादी की प्लेट में
लिखता है छोटू दो वक्त रोटी अपनी स्लेट में
अब चुप रहने से कुछ नहीं होने वाला
बदनसीबी से ये दौर इतनी आसानी से नहीं जाने वाला.
बहुत हो चुकी  संवेदना,
भाषणों  से कुछ नहीं होने वाला,
छोटू को असलियत में रोटी चाहिए,
रोटी शब्द से पेट नहीं भरने वाला.
मांगने से मिलती भीख है ,
हक़ कभी नहीं मिलने वाला.
छोड़ दो नादानियाँ लड़ो एकसाथ हक़ के लिए,
आपस में लड़ने से कुछ नहीं मिलनेवाला ...

ताहिर अली
09893311636

Monday, January 25, 2010

हिस्से

कई हिस्सों में बट गया आदमी.
एक आदमी अनेक हिस्सों में बटने के बाद भी जिन्दा है.
जिन्दा है हर हिस्से के लिए,
आदमी जब पैदा हुआ तभी उसके हिस्से थे,
किन्तु जैसे आदमी बढता गया वैसे उसके हिस्से भी बड़ते गए ,
हिस्सों में बटते बटते आदमी के हिस्से में कुछ नहीं बचा,
बचे सिर्फ हिस्से औ़र आदमी बचा इन हिस्सों को बचाने के लिए,
आदमी कभी माँ के हिस्से में आया,
कभी बाप,कभी भाई औ़र कभी बहिन के ,
इन हिस्सों में बटने के बाद जो हिस्से बचे ,
वो हिस्से आए पत्नी औ़र बच्चों के हिस्से .
इस तरह एक आदमी औ़र असंख्य हिस्से ...................

ताहिर अली
09893311636

म्रत्यु

म्रत्यु तुम्हारी भूख कब मिटेगी, कब बंद करोगी?
अपना वो तांडव जो तुम एक दूध मुहे बच्चे औ़र उसकी मां के साथ रचती हो?
क्या जीवन से बेदखल हुए बूढों  को लील कर तुम्हारी भूख नहीं मिटती. 
म्रत्यु क्या तुम भी भूख हड़ताल करती हो ?
औ़र जब तुम्हारी शर्त मान ली जाती है,
तब तुम बेहद विकराल रूप में अपनी भूख मिटाती हो  ,
कभी भूकंप,कभी बाढ़ तो कभी कोई बढ़ी दुर्घटना के रूप में.
म्रत्यु क्या सचमुच तुम जीन्दगी से बड़ी हो ?
ये मुझे तब तब लगता है जब जब तुम,
एक नन्हे मुन्ने को छीनती हो उसकी माँ के आँचल से,
म्रत्यु क्या तुम्हे जरा भी तरस नहीं आता?
अपनी माँ के स्तनों से चिपटे बच्चे को अलग करते हुए?
म्रत्यु खीझ आती है मुझे तुम औ़र तुम्हारे काम पर.
म्रत्यु किसी माँ के पास चन्द लम्हे गुजारो शायद तुम्हारी जिन्दगी में परिवर्तन आ जाये.

बेकाम

अब तुम बूढ़े हो गए हो हिरवा,
एकदम बूढ़े औ़र बेकाम,
बिलकुल तुम्हारे उस बैल की तरह ,
जिसे तुमने घांस डालना छोड़ दिया था,
 किन्तु वो तुम्हारे घर औ़र उसके खूंटे को छोड़कर कंही नहीं गया था,
बेदम पड़ा रहता था अपने गुवाड़े में ,
औ़र तुम हिरवा तुम भी बड़े निर्दयी हो गए थे उस समय,
उस बैल ने तुम्हारी बरसों सहायता की थी ,
औ़र असमर्थता की स्थिति में अकेला छोड़ दिया था,
उसे तुमने उसके हल पर,
फिर आज क्यों कोसते हो अपने बेटों को?
शायद उनके लिए अब तुम बेकाम हो,
पड़े रहो अपनी कोठरी में चुपचाप ,बेदम औ़र लाचार. 

ताहिर अली
09893311636

माँ

देखकर तुझको ये सांसे चलती हैं,
तेरी सूरत मेरी माँ मेरे खुदा से मिलती है
तेरी गोद में रखके सर जब मेरी माँ सो जाता हूँ,
तब में अपने आपको खुदा के सामने ही पता हूँ,
जब में तुझसे दूर होकर तनहा सफ़र पर जाता हूँ,
दिल मेरा रोता है माँ औ़र में काफिर हो जाता हूँ,
जब कभी बातों ही बातों में तेरा ज़िक्र आता है,
सच कहूँ तो उस घड़ी सजदे में से झुक जाता है,
बुत परस्ती का ना मुझको इल्म है ना शौक है,
दिल ने माना रब तुझे औ़र रब से ये बेख़ौफ़ है,
मिटा दूँ खुद को गर तेरी पेशानी पे बल पड़े,
हँसते हँसते लड़ जाऊ खुदा से गर तेरे लिए लड़ना पड़े.
                                                                              ताहिर अली
                                                                           09893311636


प्यारे गाँव

प्यारे गाँव बिछड़ कर तुझसे रोया सारी रात,
महानगर में नहीं पूछता कोई मेरी बात,
नहीं बरगद की छाया, नहीं हरी पगडण्डी,
स्वस्थ्य शरीरों की लगती है रोज यहाँ पर मंडी,
रोशनियाँ है पर चौराहे अन्धकार में डूबे,
राजपथ है भूल भुलैया गलियां बहुत घमंडी.
हर डोली में एक लाश है नंगी हर बारात,
प्यारे गाँव बिछड़ कर तुझसे रोया सारी रात................